दरिया रूठी रूठी है, हर मंज़र बंजर बंजर है.
सूखी सूखी डाली पर, परिंदा जैसे बेपर है.
मेरे जीवन के इस 'कैनवस' पर, आकर कोई रंग भरो.
Friday, December 17, 2010
Saturday, November 27, 2010
Monday, November 22, 2010
Thursday, September 16, 2010
Sunday, September 12, 2010
Saturday, September 4, 2010
Saturday, August 21, 2010
Monday, February 15, 2010
Corporate film for NIIT
दिल्ली – ख़्वाबों का शहर
रोज़ रूप बदलता हुआ, नई ऊँचाइयाँ छूता हुआ.
आँखों में सपने पाले, भीड़ में ख़ुद को तलाशता शहर.
एक ही शहर में कई दुनिया
एक दूसरे से अजनबी, फिर भी एक – दूसरे से जुडी हुई.
ख़ूबसूरत ……………
चंचल ……………….
जगमगाता …………………..
रंग बदलता शहर.
किसी मुठ्ठी में क़ैद है ये,
किसी मुठ्ठी से फिसलती रेत है ये.
उम्मीदों के पंख लगाये, ख़्यालों से भी तेज़ ……..दिल्ली.
रोज़ रूप बदलता हुआ, नई ऊँचाइयाँ छूता हुआ.
आँखों में सपने पाले, भीड़ में ख़ुद को तलाशता शहर.
एक ही शहर में कई दुनिया
एक दूसरे से अजनबी, फिर भी एक – दूसरे से जुडी हुई.
ख़ूबसूरत ……………
चंचल ……………….
जगमगाता …………………..
रंग बदलता शहर.
किसी मुठ्ठी में क़ैद है ये,
किसी मुठ्ठी से फिसलती रेत है ये.
उम्मीदों के पंख लगाये, ख़्यालों से भी तेज़ ……..दिल्ली.
For Net Ambit Corporate.....
बड़ी हिफाज़त से एक ख़्वाब महफूज़ था उन नन्ही आँखों में ....
ख़्वाब जो पंख खोलना चाहता था ………….
ख़्वाब जिसको वक़्त ने बुनियाद दी थी ………..
ख़्वाब जिसे शिद्दत ने जवानी बख्शी थी …..
ख़्वाब जिसमें रुकावटों ने जूनून भरा था ……..
ख़्वाब जो मुस्कुराता रहा हर मुश्किलों के बावजूद ……
ख़्वाब जिसे हार मानना आता ही नहीं था ……..
ख़्वाब जो गिरता था, चोट खाता था,
फिर धूल झाड़कर खड़ा हो जाता था ……
ख़्वाब जिसकी हसरत थी सितारों की तरह जगमगाना ………..
ख़्वाब जिसकी ज़िद थी दिलों पर राज करने की …………………….
वो ख़्वाब आज हक़ीक़त है ,
क्योंकि उन दो आँखों ने बड़ी ईमानदारी से देखा था वो ख़्वाब …
क्या आप में भी है हिम्मत ख़्वाब देखने की ……..
सपने ईमानदारी से देखिये. सच भी हो सकतें हैं.
ख़्वाब जो पंख खोलना चाहता था ………….
ख़्वाब जिसको वक़्त ने बुनियाद दी थी ………..
ख़्वाब जिसे शिद्दत ने जवानी बख्शी थी …..
ख़्वाब जिसमें रुकावटों ने जूनून भरा था ……..
ख़्वाब जो मुस्कुराता रहा हर मुश्किलों के बावजूद ……
ख़्वाब जिसे हार मानना आता ही नहीं था ……..
ख़्वाब जो गिरता था, चोट खाता था,
फिर धूल झाड़कर खड़ा हो जाता था ……
ख़्वाब जिसकी हसरत थी सितारों की तरह जगमगाना ………..
ख़्वाब जिसकी ज़िद थी दिलों पर राज करने की …………………….
ख़्वाब जिसने मंज़िल तक बनाया था अपना रास्ता ……..
वो ख़्वाब आज हक़ीक़त है ,
क्योंकि उन दो आँखों ने बड़ी ईमानदारी से देखा था वो ख़्वाब …
क्या आप में भी है हिम्मत ख़्वाब देखने की ……..
सपने ईमानदारी से देखिये. सच भी हो सकतें हैं.
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