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My Scripts & त्रिवेणी.......
Monday, September 12, 2011
दहशतगर्दों के नाम एक त्रिवेणी:
हैरानी, बड़ी परेशानी, था एक दहशत में
ज़िम्मेदार वो ही इस कफ़न का था....
कफ़न के पीछे चेहरा उसकी बहन का था...
इश्क़ -ओ- इबादत का नाज़ हूँ मैं
पहले तेरा तलबगार था अब मोहताज हूँ मैं
मुहब्बत में मजबूर मक़बूल होता है........
बदन ओढ़कर गयी थी रूह....
बदन छोड़कर आई है......
ज़िन्दगी की यही कमाई है......
चव्वनी को श्रधांजलि:
मन्नत वो सवा रुपये चढाने की.......
हसरत ख़ुदा से तुम्हे पाने की.....
चव्वनी अपने साथ ले गयी....
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फ़क़ीर की झोली से - नज़्में
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