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My Scripts & त्रिवेणी.......
Thursday, September 16, 2010
भुला चुका हूँ जिसे अपने मन से...
मिटा चुका हूँ जिसे अपने ज़ेहन से...
डायरी से उसका नाम काटा नहीं जाता....
Sunday, September 12, 2010
बहुत धीरे - धीरे हौले - हौले सहमें - सहमें
गुलाबी पंखुड़ियों पे किसी शबनम से
उसके लबों पे लफ्ज़ उतरतें हैं.....
एक मुद्दत के बाद किताब खुली.
एक मुद्दत के बाद वो गुलाब दिखा.
कैसे कह दूं कि मुलाकात नहीं होती.
तेरे साथ मेरा तन्हाई का रिश्ता है.
जैसे बदन से परछाई का रिश्ता है.
तुम पास होती हो,जब पास नहीं होती.
Saturday, September 4, 2010
आदत होती तो टूटकर वो छूट जाता.
दिल के पास न रहता जो वो रूठ जाता.
क्या करें कि
जब एक दूसरे की लत लग जाये.
कहते हो कि तुम मेरी मुहब्बत नहीं हो
गैर की हो तुम मेरी चाहत नहीं हो.
फिर नज़रों का इकरार-ए- इश्क क्या है.....
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फ़क़ीर की झोली से - नज़्में
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