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My Scripts & त्रिवेणी.......
Thursday, July 18, 2013
उसी तरह हंसते हो, उसी तरह रोते हो
जब देखो वही पहचान ओढ़े होते हो
ज़रा बदलो कि
दुनिया तस्वीर न समझ ले कहीं
Monday, September 12, 2011
दहशतगर्दों के नाम एक त्रिवेणी:
हैरानी, बड़ी परेशानी, था एक दहशत में
ज़िम्मेदार वो ही इस कफ़न का था....
कफ़न के पीछे चेहरा उसकी बहन का था...
इश्क़ -ओ- इबादत का नाज़ हूँ मैं
पहले तेरा तलबगार था अब मोहताज हूँ मैं
मुहब्बत में मजबूर मक़बूल होता है........
बदन ओढ़कर गयी थी रूह....
बदन छोड़कर आई है......
ज़िन्दगी की यही कमाई है......
चव्वनी को श्रधांजलि:
मन्नत वो सवा रुपये चढाने की.......
हसरत ख़ुदा से तुम्हे पाने की.....
चव्वनी अपने साथ ले गयी....
Thursday, May 26, 2011
तुम्हारी गली की दो झांकती नज़रों ने चुराया होगा....
मुझे यक़ीन है कि तुम्ही ने उन्हें बताया होगा....
मेरे कुर्ते की बायीं जेब से दिल ग़ायब है.....
सर्दियों की एक भरी दोपहर
मेरी बाँहों की दुशाला ओढ़कर
सहर सोयी रही अलसायी सी...
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फ़क़ीर की झोली से - नज़्में
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