Saturday, November 27, 2010

देर तक देखता रहा आईना मैं,

और देर तक नहीं मिला खुद को,


ज़रा अपनी दिल की तलाशी तो लेना....


Monday, November 22, 2010

वफ़ा क्या है, किसी का भरम है....
चुभती सी, टूटी सी कोई कसम है. 


बस बेवफाई को है ऐतबार तेरी वफ़ा का....


अब तुम मुझे भूले से भी याद नहीं आती...
ख्वाब-ओ-ख्याल में भी तुम्हारी बात नहीं आती...

बस तेरे आखिरी SMS को रोज़ देखने की आदत बाकी है...
दर्द है, दर्द की तमन्ना है, दर्द की ख्वाहिश है...
इश्क क्या है, कुछ नहीं.. दर्द की फरमाइश है...

आ कि दिल के ज़ख्म सूखने लगे हैं...
घंटो टी वी देखा पर, उसपर क्या देखा पता नहीं.
दूर रहा मगर तुझसे इकपल भी रहा जुदा नहीं.


रुखसत लेने से पहले 'मुझको' मुझे लौटा जाओ...........
जिसे मैंने था अपना माना
दिल जिसका था कभी आशियाना


वो फक़त एक किरायेदार निकला...
जिस खुदा का मुहब्बत से कोई वास्ता नहीं.....
इंसां से इंसां तक पहुंचे जिसका रास्ता नहीं........'


फिर काफ़िर हूँ मैं उस खुदा के लिए....
तुमसे   दिल  लगाने  चला  हूँ मैं,
हथेली पर दही जमाने चला हूँ मैं.. 

आसां इश्क़ तौहीन -ए- इश्क़ है..