रोज़ रूप बदलता हुआ, नई ऊँचाइयाँ छूता हुआ.
आँखों में सपने पाले, भीड़ में ख़ुद को तलाशता शहर.
एक ही शहर में कई दुनिया
एक दूसरे से अजनबी, फिर भी एक – दूसरे से जुडी हुई.
ख़ूबसूरत ……………
चंचल ……………….
जगमगाता …………………..
रंग बदलता शहर.
किसी मुठ्ठी में क़ैद है ये,
किसी मुठ्ठी से फिसलती रेत है ये.
उम्मीदों के पंख लगाये, ख़्यालों से भी तेज़ ……..दिल्ली.

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