Monday, November 22, 2010

वफ़ा क्या है, किसी का भरम है....
चुभती सी, टूटी सी कोई कसम है. 


बस बेवफाई को है ऐतबार तेरी वफ़ा का....


3 comments:

  1. वाह! दोस्त, क्या लिखा है. उम्दा.
    शुक्रिया. जारी रहें.
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    कुछ ग़मों के दीये

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  2. बस बेवफाई को है ऐतबार तेरी वफ़ा का....

    aisi paNktiyaN aaj bhi aakarshit kartiN haiN.

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  3. इस नए सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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